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Rajasthan News: बदल गया LLB कोर्स का पैटर्न, जल्द लागू हो रही नई व्यवस्था, ये टेस्ट देना होगा जरूरी

राजस्थान हाईकोर्ट को 90 फीसदी वकील और करीब 70 फीसदी न्यायाधीश देने वाले जोधपुर के जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय (जेएनवीयू) से अब वकालत करना आसान नहीं होगा।

राजस्थान हाईकोर्ट को 90 फीसदी वकील और करीब 70 फीसदी न्यायाधीश देने वाले जोधपुर के जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय (जेएनवीयू) से अब वकालत करना आसान नहीं होगा। अगले साल शैक्षणिक सत्र 2024-25 से जेएनवीयू पंचवर्षीय विधि पाठ्यक्रम (बीए एलएलबी, बीबीए एलएलबी) और तीन वर्षीय विधि पाठ्यक्रम (एलएलबी) के लिए प्रवेश परीक्षा लागू करने जा रहा है। यहां 1947 से एलएलबी शुरू हुई थी। एलएलबी के 75 साल से अधिक होने के मौके पर विवि यह नवाचार करने जा रहा है। इससे योग्य अभ्यर्थी ही वकील बन पाएंगे।

80 की जगह 60 का सेक्शन

वर्तमान में एलएलबी की 320 सीटों के लिए 80 सीटों के चार सेक्शन है। विवि ने अगले साल से 60 सीट का सेक्शन करने के लिए बार काउंसिल ऑफ इंडिया को प्रस्ताव भेजा है। विवि ने एलएलबी में स्ववित्त पोषित आधार पर सेक्शन पहले से ही बंद कर दिए हैं। इसके अलावा विवि ने पंचवर्षीय विधि पाठ्यक्रम के बीबीएल एलएलबी के स्थान पर बीकॉम एलएलबी लागू करने के लिए भी प्रस्ताव भेजा है। बीए एलएलबी और बीबीए एलएलबी में 120-120 सीटें है। बीबीए एलएलबी में सीटें खाली रह जाने के कारण यह निर्णय किया है।

320 सीट के लिए आते हैं 2500 आवेदन

विवि में एलएलबी की 320 सीटें हैं। प्रवेश के लिए करीब 2500 आवेदन आते हैं। स्नातक स्तर के प्राप्तांकों की मैरिट के आधार पर प्रवेश दिया जाता है। विवि में स्नातक स्तर पर 60 से 65 प्रतिशत अंक हासिल करने वाले टॉपर होते हैं। यहां मार्किंग टफ है, जबकि कई निजी विवि और निजी कॉलेज 80 फीसदी अंक दे देते हैं जिससे योग्य अभ्यर्थी एलएलबी में प्रवेश के लिए वंचित हो जाते थे। एलएलबी की कटऑफ भी 65 प्रतिशत के आसपास रहती है।


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